सिर्फ प्रभु/महापिता हैं। और कुछ नहीं। और कोई नहीं

नाम संकीर्तन और तस्वीरें

गुरु महाराज ने ‘नाम संकीर्तन’ को बढ़ावा देते थे। वो हमेशा इस बात का महत्व समझते थे कि मुक्ति पाने के लिए ‘नाम संकीर्तन’ ही काफी है। रोज सुबह 6.00 बजे से शाम के 6.00 बजे तक आश्रम में नाम संकीर्तन का जाप होता है। गुरूजी ने ‘योगी राम सूरत कुमार’ के नाम जाप की महत्वपूर्णता ऐसे समझाई है कि “वो इस भिक्षु का नाम नहीं है, वो महापिता का नाम है। और योगी राम सूरत कुमार का एक जाप, राम नाम के पांच गुना शक्ति के बराबर है”। इस हॉल में गुरूजी और उनके गुरुओं की तस्वीरें और उनके कहे गए हुए मुख्य उपदेश चित्रों के रूप में लगाये गए हैं।.