सिर्फ प्रभु/महापिता हैं। और कुछ नहीं। और कोई नहीं

साधु भोजन

साधू भोजन हॉल में योगी के दर्शन

यह फूस की छत जो कि बड़े प्लेटफार्म पर है। यह गुरु का निर्देश था। 1999 से (शुरू) यह कार्यक्रम शुरू हुआ। गुरु महाराज के एक भक्त ने इसे पूरी तरह प्रायोजित किया। गुरुजी के निर्देशों के अनुसार, इसकी छत हमेशा फूस की ही रहेगी.

यह गुरु का आदेश था कि अच्छे स्थानीय साधुओं और विभिन्न स्थानों से यात्रा करते हुए साधुओं का स्वागत श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए और उन्हें अन्नदानं भोजन में तीन तरह के चावल के साथ सब्जियों और (एक) फल खिलाने चाहिए

हमें उनके हाथ और पैर धोने के लिए उनकी मदद करनी चाहिये और आदर के साथ नमस्कार करते हुए उन्हें विदा करना चाहिए। संतोष के साथ दिया हुआ उनका आशीर्वाद इस स्थान को सुखद आश्रम बनाएगा