सिर्फ प्रभु/महापिता हैं। और कुछ नहीं। और कोई नहीं

सिद्धी स्थल

यह तीन कमरों का निर्माण प्रधान मंदिर के दक्षिण दिशा में स्थित है.सन 2000 पूर्व, गुरु महाराज ‘कार्सेनोरा’ से अस्वस्थ हो गए, और इसी कारण से उनपर लगातार ध्यान देना पड़ता था.स्वामी ने इस इमारत को ‘अबोड़’ का नाम दिया.तब से वे इस भवन में 17.08.2001 तक रहे,चेन्नई में उपचार करवाने के बाद वे 23.11.2000 से मध्य कमरे में रहने लगे.20.02.2001 को सुबह 3.19 बजे उनकी अंतिम यात्रा इसी मध्य कक्ष के बिस्तर से हुई.इस भवन में आप आश्रम में भगवान् की गतिविधियों, उनके द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं और उनके द्वारा पढ़ी गई पुस्तकों को देख सकते हैं.आखिरी समय पर उनके द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं को आप अलग से कांच के शोकेस में देख सकते हैं.