सिर्फ प्रभु/महापिता हैं। और कुछ नहीं। और कोई नहीं

अंतर्ज्ञान और त्याग

1952 में उन्हें श्री अरबिंदो और रमण महर्षि के निर्वाण का ज्ञात हुआ। सत्य की खोज में अपने प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए वे आनंद आश्रम, कान्हागढ़, के लिए रवाना हुए। वहां उनके गुरूजी ने उन्हें ओम श्री राम जय राम जय जय राम मंत्र का जाप करने के लिए कहा। हर समय राम मंत्र का जाप करने से उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हुआ।.