सिर्फ प्रभु/महापिता हैं। और कुछ नहीं। और कोई नहीं

दूर-दूर की यात्रा करने वाले संत

‘उन्होंने 1952 से 1959 तक पद यात्रा की, और फिर वे तिरुवन्नामलाई में बस गए। वे पुन्नी पेड़ के नीचे, या रेलवे प्लेटफार्म पर, अरुणाचलेश्वर मंदिर, या रात को बर्तनों की दुकानों में रहते थे। वे अरुणांचलेश्वर पर्वत की परिक्रमा करते थे।.