सिर्फ प्रभु/महापिता हैं। और कुछ नहीं। और कोई नहीं

दक्षिण भारत की यात्रा

एक घटना ने उन्हें जीवन और मृत्यु का कारण तलाश करने के लिए प्रेरित किया। कपाड़िया बाबा ने उसका उत्तर जानने के लिए उन्हें दक्षिण भारत जाने का निर्देश दिया। 1947 और 1948 में उन्होंने अरबिंदो आश्रम, पुडुचेरी, रमण आश्रम, तिरुवन्नामलाई और आनंद आश्रम, कान्हागढ़ की यात्रा की।